
जिले की कई तहसीलों में पटवारियों की मनमानी – वर्षों से एक ही हल्का में जमे पटवारी, भ्रष्टाचार की शिकायतें तेज
किसान परेशान, फेरबदल की उठी मांग
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही:-जिले की विभिन्न तहसीलों—सकोला,पेंड्रारोड,मरवाही और गौरेला क्षेत्र—में किसानों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि कई पटवारी वर्षों से एक ही हल्का (कार्य क्षेत्र) में जमे हुए हैं। जबकि राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी पटवारी का कार्यकाल एक हल्का में अधिकतम तीन वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए।
किसानों का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर कुछ पटवारियों को लंबे समय से एक ही जगह टिकाए रखा गया है, जिसके चलते उनकी मनमानी और भ्रष्टाचार बढ़ा है। नामांतरण, सीमांकन, खसरा–नक्शा, बंटवारा जैसे कार्यों में पटवारियों पर सुविधा शुल्क लेने और जानबूझकर अड़ंगेबाज़ी करने के आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
नियमों की अनदेखी पर सवाल….?
राजस्व संहिता के अनुसार, एक ही हल्का में तीन वर्ष से अधिक पदस्थापना नियम विरुद्ध है। इसके बावजूद जिले की कई तहसीलों में वर्षों से पटवारियों को नहीं बदला गया। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसानों की मांग…?
किसानों ने जिला प्रशासन और एसडीएम से मांग की है कि
जिले की सभी तहसीलों में पदस्थ पटवारियों के कार्यकाल की समीक्षा की जाए।
जिनका कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक हो चुका है, उनका तत्काल फेरबदल किया जाए।भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि निष्पक्ष प्रशासन और पारदर्शी व्यवस्था के लिए जिलेभर में पटवारियों का नियमित फेरबदल बेहद जरूरी है।





